
I-PAC (Indian Political Action Committee) केस में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया है।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने अहम निर्देश देते हुए कहा है कि छापेमारी के दौरान के CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल कोई कार्रवाई न हो
अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।
SC का सख्त संदेश: Democracy में हर अंग Independent
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा— लोकतंत्र में हर संस्थान को स्वतंत्र रूप से काम करने देना जरूरी है।
कोर्ट ने साफ किया कि कोई भी केंद्रीय एजेंसी चुनावी गतिविधियों में दखल नहीं दे सकती, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया— क्या चुनाव का बहाना बनाकर एजेंसियों को गंभीर अपराधों की जांच से रोका जा सकता है?
Between the लाइन्स – ना राजनीति shield बने, ना जांच witch-hunt हो—balance जरूरी है।
Courtroom में High Voltage Debate
इस मामले में ED की ओर से: Solicitor General Tushar Mehta, बंगाल सरकार की ओर से: Senior Advocate Kapil Sibal
दोनों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
“HC बन गया था Jantar Mantar”
SG तुषार मेहता ने कहा कि जब कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, कोर्ट परिसर जंतर-मंतर जैसा बन गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जो कुछ हाईकोर्ट में हुआ, वह चिंताजनक है।
कपिल सिब्बल ने जवाब दिया— आगे से ऐसा नहीं होगा।

ED के आरोप: ‘राज्य पुलिस ने सीमा लांघी’
SG मेहता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य पुलिस अधिकारी राजनीतिक आकाओं के साथ धरने पर बैठे। ED अधिकारी का मोबाइल फोन छीना गया। एक परिसर से आपत्तिजनक सामग्री बिना अधिकार उठाई गई, जो सीधे तौर पर चोरी है
ऐसी घटनाएं केंद्रीय बलों के मनोबल को तोड़ती हैं।
Kapil Sibal का बचाव: ‘Laptop सिर्फ personal था’
कपिल सिब्बल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा— ममता बनर्जी सिर्फ अपना personal laptop और iPhone लेकर गई थीं। दोपहर 12:05 बजे तक कोई official seizure नहीं हुई थी। I-PAC का election data बेहद गोपनीय होता है
उनका सवाल था— चुनाव के बीच ED ने I-PAC पर छापा क्यों मारा?
‘Election के बीच ED क्यों?’—Political Timing पर सवाल
सिब्बल ने दलील दी कि I-PAC 2021 से TMC के लिए काम कर रहा है। वहां candidate data और election strategy मौजूद होती है। ऐसे समय में छापा mala fide intent दर्शाता है।
Election war-room या investigation zone—रेखा कौन खींचेगा?
DGP को हटाने की मांग, मामला और गरमाया
ED ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल कर DGP Rajeev Kumar समेत शीर्ष अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है। ED का आरोप है कि इन अधिकारियों ने जांच में बाधा डाली। कथित सबूतों की “चोरी” में मदद की।
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